Iran Vs Israel War: ईरान और इजरायल-अमेरिका विवाद का कारण..?

Iran Vs Israel War: दुसरे वर्ल्डवार के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि एक साथ 15 देशों पर एक साथ हमले हुए हैं। क्या iran Vs Israel war 2026 कहीं ये मिनी वर्ल्डवार का रूप तो नहीं ले लेगा। एक तरफ अमेरिका और इजराइल की सेना है जो एक टीम की तरह ईरान पर लगातार हमले कर रही है। तो दूसरी तरफ ईरान पष्चिमी एशिया के कुल 12 मुस्लिम देशों पर हमला कर चूका है। ये सभी देश अमेरिका के सहयोगी हैं। काफी लोग इस युद्ध में मारे जा चुके हैं। ईरान बेपरवाह से ड्रोन और मिसाइल से लगातार हमला कर रहा हैं। दोस्तो अब इस युद्ध के कारण को हम समझेंगे। आखिर इस युद के पीछे क्या भारत का हाथ है या कोई ऐतिहासिक बातें हैं।

दरअसल, Iran Vs Israel War (ईरान और इजराइल वॉर) 2026 में सबसे पहले 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल ने ईरान के तेहरान में हमला शुरू किया, ईरान की सबसे बड़ी आयल फैक्ट्री पर हमला किया गया। ईरान ने भी अपने ड्रोन और मिसाइल से अमेरिका, इजराइल और अन्य 12 देशों पर हमले करना शुरू कर दिया। ईरान के मुताबिक इस युद में ईरान का काफी नुकशान हो चूका है। चलिए जानते हैं उन 12 देशो के नाम पर ईरान ने ड्रोन और मिसाइल से हमले किये हैं।

इजराइल इराक
यूएईओमान
सऊदी अरबसीरिया
कतरबहरीन
कुवैत साइप्रस
जॉर्डन अमेरिका

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ये सभी देश वहीं है जो अमेरिका के सहयोगी हैं या फिर अमेरिका के सैनिक अड्डे हैं। साइप्रस को छोड़कर ये सभी पष्चिमी एशिया मे है। फ़िलहाल पूरा पष्चिमी एशिया इस युद्ध की चपेट में है। और तो और ईरान ने इन 12 देशो के अलावा 3 अन्य सैनिक अड्डों पर हमला किया है जैसे कि -फ़्रांस, इटली और ब्रिटेन।

दरअसल दोस्तो, ईरान जम्बुद्वीप के दक्षिण-पश्चिम खंड में स्थित एक देश है। इजराइल और सऊदी अरब, अमेरिका के दोस्त हैं वहीँ दूसरी ओर ईरान इजराइल और सऊदी अरब को अपना दुसमन मानते हैं। सूत्रों के मुताबिक अमेरिका, इजराइल और सऊदी अरब को कहता है कि तुम ईरान पर हमला कर सकते हो हम तुम्हे हथियार, ड्रोन, और मिसाइल दे देंगे।

Iran Vs Israel War इस युद के पीछे का कारण 1 सितम्बर 1939 को द्वितीय विश्व युद्ध बताया जा रहा है। यहूदियों का कहना था कि ये देश गद्दार हैं हमें सुरक्षा की द्रष्टी से अलग देश चाहिए। फिर सरकार ने सभी यहूदियों को अपना एक अलग देश “इजराइल” बना दिया। साल 1948 में इजराइल ने घोषणा की हम यहूदि आज़ाद हो गए हैं हमको हमारा एक अलग देश मिल गया है। दरअसल घोसणा करते ही पहले दिन से ही ईरान और बाकी मुस्लिम देशो ने इजराइल पर हमला शुरू कर दिया। क्योंकि ईरान नहीं चाहता था कि यहूदियां अपना एक अलग देश बनाएं। उसके बाद साल 1953 में ईरान की सरकार मोहमद मोसेडेक थी, जिसने इजराइल को मंजूरी दी लेकिन थोड़े दिन बाद जैसे ही ईरान में मोहमद मोसेडेक की जगह मोहमद रेजा की सरकार आयी तब ईरान में अमेरिका की चलने लगी अब अमेरिका जैसा चाहता था ईरान वैसा ही करने लगा। ईरान ने इजराइल से कहा तुम हमे हथियार दो और हम तुम्हे तेल देंगे। थोड़े दिन बाद ईरान में लोग धर्म को लेकर आवाज उठाने लग गए जिसमे से एक महिला “रुहेला सुमेनी” ने कहा कि ईरान अमेरिका का कल्चर ला रहा है। जिसके थोड़े दिन बाद ईरान के लोगो ने “रुहेला सुमेनी” को शाशन संभाल दिया। रुहेला सुमेनी कहती थी कि कौन है अमेरिका, ईरान अपने खुद के कल्चर से चलेगा किसी के तलवे नहीं चाटेगा। ईरान का कहना था कि अमेरिका हमारा सबसे बड़ा और इजराइल छोटा दुशमन है।

रुहेला सुमेनी ने कुछ दिनों तक शाशन चलाया उसके बाद ईरान में “खेमनेई” की सरकार आई। उस समय खेमनेई की अमेरिका के साथ कुछ अच्छे सम्बन्ध नहीं चल रहे था, तो इजराइल ने अमेरिका के कहने पर खेमनेई को मार दिया। उसी दिन से ईरान, इजराइल और अमेरिका को अपना सबसे बड़ा दुशमन मानने लग गया। और आज 2026 में इस युद्ध का वही कारण है जो हमने आपको इस लेख द्वारा चर्चा की है।

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